मधुबनी की सांस्कृतिक, दार्शनिक और बौद्धिक विरासत को नई ऊर्जा देने वाला ऐतिहासिक आयोजन::-कुलपति प्रो० रमाकांत पाण्डेय,
“भामती वाचस्पति महोत्सव–2026” का परिचर्चा सत्र के साथ भव्य शुभारंभ”
उद्घाटन करते
मधुबनी
मधुबनी में कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा जिला प्रशासन, मधुबनी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “भामती वाचस्पति महोत्सव–2026” का शुभारंभ आज एक गरिमामय एवं बौद्धिक वातावरण में परिचर्चा सत्र के साथ हुआ। यह महोत्सव मिथिला की समृद्ध दार्शनिक परंपरा, सांस्कृतिक चेतना तथा ज्ञान-साधना की गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आयोजन स्थल पर विद्वानों, शिक्षाविदों, संस्कृति प्रेमियों, शोधार्थियों एवं आम नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने इस महोत्सव को विशेष गरिमा प्रदान की।शुभारंभ अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० रमाकांत पाण्डेय, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री नीतीश कुमार, भामती वाचस्पति समिति के अध्यक्ष श्री रत्नेश्वर झा, प्रो० देवनारायण झा, प्रो० सुरेश्वर झा, प्रो० दीपनाथ झा तथा डॉ० संजीत कुमार सहित अनेक विद्वतजन एवं गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने भामती और वाचस्पति मिश्र की दार्शनिक परंपरा, मिथिला की बौद्धिक धरोहर और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।

परिचर्चा सत्र में वक्ताओं ने कहा कि मधुबनी केवल कला और लोकसंस्कृति की भूमि ही नहीं, बल्कि दर्शन, तर्कशास्त्र, शास्त्रार्थ और वैचारिक परंपरा की भी एक महान भूमि रही है। वाचस्पति मिश्र और भामती जैसी विभूतियां इस क्षेत्र की उस प्रखर बौद्धिक चेतना का प्रतीक हैं, जिसने भारतीय ज्ञान-संपदा को नई दिशा दी। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि ऐसे महोत्सव नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, सांस्कृतिक अस्मिता को मजबूत करने तथा स्थानीय गौरव को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।इस अवसर पर कार्यक्रम से संबंधित महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्री “सर्वतन्त्र स्वतंत्र” का विधिवत विमोचन किया गया। यह डॉक्यूमेंट्री भामती-वाचस्पति परंपरा, मिथिला की ज्ञानधारा तथा इस सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न आयामों को प्रभावकारी ढंग से प्रस्तुत करती है। इसके साथ ही स्मारिका “वाचस्पति दर्पण–2026” का भी औपचारिक लोकार्पण किया गया। स्मारिका में महोत्सव, भामती-वाचस्पति परंपरा तथा क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण और शोधपरक आलेख संकलित हैं, जो इस आयोजन को एक स्थायी वैचारिक दस्तावेज का स्वरूप प्रदान करते हैं।महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर यह स्पष्ट रूप से प्रतिध्वनित हुआ कि भामती वाचस्पति महोत्सव–2026 केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि मिथिला की आत्मा, उसकी स्मृति, उसकी विद्वत्ता और उसके सांस्कृतिक गौरव का उत्सव है।

यह आयोजन स्थानीय परंपराओं के सम्मान, सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण तथा ज्ञान-आधारित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।आयोजन से जुड़े अधिकारियों एवं विद्वानों ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना, मिथिला की शास्त्रीय परंपरा को पुनर्प्रतिष्ठित करना तथा समाज में साहित्य, संस्कृति और दर्शन के प्रति व्यापक रुचि का विकास करना है। इस प्रकार के आयोजन मधुबनी को एक सशक्त सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होंगे।महोत्सव के अंतर्गत आज संध्या 6:00 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ होगा। सांस्कृतिक संध्या में क्षेत्रीय लोक-संस्कृति, पारंपरिक कला, संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मिथिला की जीवंत सांस्कृतिक आत्मा का मनोहारी प्रदर्शन किया जाएगा। आयोजकों ने जिले के नागरिकों, कला प्रेमियों, विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों एवं संस्कृति अनुरागियों से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनने की अपील की है।“भामती वाचस्पति महोत्सव–2026” का यह शुभारंभ मधुबनी के सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। यह आयोजन न केवल अतीत के गौरव को स्मरण करने का अवसर है, बल्कि वर्तमान को सांस्कृतिक चेतना से संपन्न करने और भविष्य को वैचारिक आधार प्रदान करने की दिशा में भी एक प्रेरक पहल है। जिला प्रशासन, मधुबनी तथा कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार की यह संयुक्त पहल निश्चित रूप से जिले की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई प्रदान करेगी।
