January 23, 2026
कल्याणी निवास में आयोजित हुई भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा
दरभंगा
दरभंगा स्थित कल्याणी निवास में शनिवार को महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन के तत्वावधान में दरभंगा राज की अंतिम महारानी एवं फाउंडेशन की दाता न्यासी महारानी कामसुन्दरी साहिबा की स्मृति में एक गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर न्यासियों एवं गणमान्य नागरिकों ने महारानी जी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।वक्ताओं ने कहा कि महारानी कामसुन्दरी साहिबा का जीवन राज दरभंगा के इतिहास का एक ऐसा शांत और गहन अध्याय रहा, जिसने बिना किसी आडंबर के दूरगामी प्रभाव छोड़ा। मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी रहे दरभंगा की शिक्षा, संस्कृत, शास्त्र, धर्म और समाजसेवा की परंपरा की वे अंतिम सजीव कड़ी थीं। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह के साथ जुड़ा उनका जीवन उस कालखंड का साक्षी रहा, जब राजसत्ता लोककल्याण और सामाजिक उत्तरदायित्व का माध्यम हुआ करती थी।सभा में फाउंडेशन के न्यासी पद्मश्री डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि महारानी साहिबा अपने समय से कहीं आगे की सोच रखने वाली असाधारण बौद्धिक व्यक्तित्व थीं। वे केवल राजपरिवार की प्रतिनिधि नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक, संवेदना और सामाजिक दायित्व से युक्त सजग चिंतक थीं। उन्होंने कहा, “महारानी साहिबा के नाम और योगदान को केवल स्मृतियों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। जब तक उनका नाम जीवित रहेगा, तब तक उनकी विरासत भी जीवित रहेगी।”फाउंडेशन के न्यासी प्रोफेसर शिरीश चंद्र चौधरी ने कहा कि महारानी साहिबा मिथिला की बौद्धिक और सांस्कृतिक परंपरा की सशक्त संवाहिका थीं। शिक्षा, साहित्य, कला और समाजसेवा के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है।पंडित श्री रामचन्द्र झा ने कहा कि महारानी साहिबा का संपूर्ण जीवन त्याग, सेवा और जनकल्याण की परंपरा का प्रतीक रहा। उनका योगदान मिथिला के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।श्रद्धांजलि सभा में श्री विशाल जीत सिंह ‘राठौर’ एवं श्री वरुण कुमार सिंह की भी उपस्थिति रही। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि महारानी साहिबा की बौद्धिक विरासत, उनके विचार और सामाजिक योगदान को संरक्षित कर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना फाउंडेशन का प्रमुख उद्देश्य है, जिसके लिए न्यास निरंतर सक्रिय रहेगा।उपस्थित प्रमुख लोग दरभंगा राजपरिवार के रत्नेश्वर सिंह, पद्मश्री डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह, प्रो. शिरीश चंद्र चौधरी, पंडित श्री रामचन्द्र झा, उदय नाथ झा, श्रुतिकर झा, पारस नाथ सिंह ठाकुर, विशाल जीत सिंह ‘राठौर’, वरुण कुमार सिंह, अजयधारी सिंह, डॉ. मंजर सुलैमान, डॉ. सुशान्त कुमार, डॉ. मो. जमील हसन अंसारी, संतोष कुमार झा सहित अन्य।

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