23 जनवरी वसंत पंचमी – विद्या, कला, चेतना और कृषि का महापर्व::-डॉ. राघव नाथ झा
मधुबनी
मोहन झा
अस्थि पुष्प, आम का मंजर और द्रोण पुष्प को विशेष महत्व, पञ्चमी, शुक्रवार, पूर्वभाद्र नक्षत्र एवं सिद्ध योग जब शीत ऋतु धीरे-धीरे पीछे हटती है और खेतों-खेतों में सरसों के पीले फूलों की कोमलता खिल उठती है, तभी 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि ज्ञान, कला, सृजनशीलता और कृषि में समृद्धि का प्रतीक है।वसंत पंचमी का विशेष संबंध विद्या, बुद्धि और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती से है। भारतीय परंपरा में ज्ञान को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है और मां सरस्वती उसे प्रकट करने वाली दिव्य शक्ति मानी जाती हैं। मान्यता है कि इसी दिन उनका प्राकट्य हुआ था, इसलिए यह पर्व विद्या-साधना, चेतना जागरण और सृजनात्मकता का विशेष अवसर है। विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, कलाकार और संगीतकार इस दिन शुद्ध मन से विद्या, विवेक और कला में प्रवीणता की कामना करते हैं।वसंत पंचमी केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और सृजनात्मकता का प्रतीक भी है। संगीत, साहित्य और कला के क्षेत्र में इस दिन का विशेष महत्व है। प्राचीन काल से इसे शुभ कार्यों की शुरुआत और प्रगति का दिन माना गया है।कृषि और बसंत का सौंदर्य आध्यात्मिक दृष्टि से वसंत पंचमी हमें स्मरण कराती है कि जैसे प्रकृति जड़ता छोड़कर नवजीवन धारण करती है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन से अज्ञान, नकारात्मकता और निराशा को त्यागकर ज्ञान, विवेक और सृजनशीलता अपनानी चाहिए।कृषि प्रधान भारत में यह पर्व और भी विशेष महत्व रखता है। इस समय रबी की फसलें पकने की अवस्था में होती हैं, और किसान प्रकृति की इस अनुकंपा को देखकर आने वाली समृद्धि की कल्पना से आनंदित होते हैं। अस्थि पुष्प, आम का मंजर और द्रोण पुष्प इस पर्व में विशेष महत्व रखते हैं और प्रकृति और कृषि के साथ पर्व का जुड़ाव दर्शाते हैं।वसंत पंचमी की विशिष्ट पहचान पीला रंग है। यह न केवल वसंत ऋतु का प्रतीक है, बल्कि ऊर्जा, सकारात्मकता और प्रसन्नता का प्रतीक भी है। इस दिन पीले वस्त्र पहनना और पीले व्यंजन अर्पित करना परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।मुहूर्त विशेष इस वर्ष वसंत पंचमी पञ्चमी तिथि, शुक्रवार को, पूर्वभाद्र नक्षत्र एवं विशेष योग – सिद्ध योग के साथ है। यह सभी शुभ ग्रहों और नक्षत्रों के संयोग के कारण शुभ कार्यों, विद्या-पूजा और नई साधनाओं की शुरुआत के लिए अत्यंत अनुकूल दिन बनाता है।23 जनवरी की वसंत पंचमी केवल उत्सव नहीं, बल्कि अंदरूनी जागृति और समाज को विद्या, कला और प्रकृति के माध्यम से प्रकाशित करने का संदेश है। यह पर्व स्मरण कराता है कि सच्चा वसंत वही है, जो हमारे विचारों, शब्दों और कर्मों में प्रकट हो।
