मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संकल्प दोहराया गया
सम्मानित होते कलाकार
मधुबनी
मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी के बहुउद्देशीय सभागार में आज विश्व कला दिवस के अवसर पर पद्मश्री सम्मान समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मिथिला चित्रकला के उन महान कलाकारों को सम्मानित करना था, जिन्होंने अपनी कला से न केवल देश बल्कि विश्व स्तर पर मिथिला की पहचान को स्थापित किया।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी मधुबनी श्री आनंद शर्मा, संस्थान के निदेशक श्री चन्द्रशेखर प्रसाद सिंह, विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रो. नरेंद्र नारायण सिंह ‘निराला’, प्रदीप कांत चौधरी (निदेशक, अनादी फाउंडेशन, दरभंगा), श्री कौशिक कुमार झा (मिथिला आर्ट इंस्टीट्यूट) एवं सुप्रसिद्ध वक्ता श्रीमती माला झा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।जिला पदाधिकारी द्वारा मिथिला चित्रकला के पद्मश्री सम्मानित कलाकारों—पद्मश्री बौआ देवी, पद्मश्री दुलारी देवी, पद्मश्री शिवन पासवान, पद्मश्री जगदंबा देवी, पद्मश्री सीता देवी, पद्मश्री गंगा देवी, पद्मश्री महासुंदरी देवी, पद्मश्री गोदावरी दत्त एवं पद्मश्री शांति देवी—के परिजनों को पारंपरिक पाग-डोपटा एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।अपने संबोधन में जिला पदाधिकारी श्री आनंद शर्मा ने कहा कि यह मधुबनी के लिए गर्व का विषय है कि यहां एक साथ नौ पद्मश्री कलाकारों की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि मिथिला चित्रकला के प्रचार-प्रसार एवं कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक ऑनलाइन ई-पोर्टल अंतिम चरण में है। इस पोर्टल के माध्यम से कलाकारों को उनकी कलाकृतियों की बिक्री का 80 प्रतिशत राशि सीधे उनके खाते में प्राप्त होगी, जबकि शेष राशि ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग पर व्यय की जाएगी।संस्थान के निदेशक श्री चन्द्रशेखर प्रसाद सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मिथिला चित्रकला केवल कला नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत स्वरूप है। उन्होंने संस्थान की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संस्थान कला के संरक्षण, शोध, अभिलेखन एवं प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र है और इसके माध्यम से लोक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा रहा है।कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री कलाकारों के परिजनों ने अपने प्रियजनों को स्मरण करते हुए उनके संघर्ष, साधना एवं उपलब्धियों को साझा किया, जिसने उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया।अनादी फाउंडेशन, दरभंगा के निदेशक प्रदीप कांत चौधरी ने विश्व कला दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी शुरुआत 15 अप्रैल 2012 को हुई थी तथा वर्ष 2019 में यूनेस्को द्वारा इसे आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि महान कलाकार लियोनार्दो द विंची के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में इस दिन को विश्व कला दिवस के रूप में मनाया जाता है।
कार्यक्रम की प्रथम वक्ता श्रीमती माला झा ने पद्मश्री सीता देवी के जीवन एवं योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्हें कला जगत का सूर्य बताया। उन्होंने कहा कि सीता देवी ने मिथिला चित्रकला को वैश्विक पहचान दिलाई और इसे अमेरिका, फ्रांस, जापान जैसे देशों तक पहुंचाया।द्वितीय सत्र में डॉ. प्रो. नरेंद्र नारायण सिंह ‘निराला’ ने अपनी पुस्तक “मिथिला चित्रकला तत्व-विमर्श” के आधार पर छात्रों को कला के साथ-साथ साहित्य, इतिहास एवं भूगोल के अध्ययन की प्रेरणा दी।कार्यक्रम का संचालन प्रथम चरण में डॉ. रानी झा एवं द्वितीय चरण में श्री प्रतीक प्रभाकर द्वारा किया गया।इस सफल आयोजन में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह प्रभारी उप-निदेशक नीतीश कुमार, लेखा पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद यादव सहित संस्थान के शिक्षकों, कर्मियों एवं अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने एक स्वर में मिथिला की इस अनमोल कला परंपरा को सहेजने एवं आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
