मधुबनी में 24 वर्ष के बाद ज्योतिष महाकुंभ के महासम्मेलन के सूत्रधार बने डॉ सुनील श्रीवास्तव

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उपस्थित ज्योतिष गण 
मधुबनी
अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष  महासम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को समापन सत्र के अवसर पर विशिष्ट विद्वानों ने अपना मंतव्य व्यक्त किया कहा।कहा कि चंद्रग्रहण सूर्य ग्रहण सहित पीतर तर्पण व सामान्य जीवन के दिन चर्या सहित पूजा पाठ जप तप ध्यान योग का निर्णय ज्योतिषाचार्य द्वारा ही किया जाता है। मिथिलांचल परिक्षेत्र के मधुबनी में 24 वर्ष के बाद हो रहे ज्योतिष महाकुंभ के महासम्मेलन के सूत्रधार डॉ सुनील श्रीवास्तव धन्यवाद के पात्र हैं।डा सुनील श्रीवास्तव के अथक परिश्रम के कारण ही आज चौबीस बर्ष बाद देश भर के जाने-माने ज्योतिषाचार्य,पंडित आचार्य व वास्तुविदों अंक गणित ज्योतिषाचार्यों की समागम महासम्मेलन मधुबनी में करवाया है।विद्वानों ने कहा कि वर्तमान केंद्रीय भाजपा सरकार द्वारा सनातन धर्म की रक्षा के लिए ढेर सारे आयामों की व्यवस्था देश के कोने-कोने में किया जा रहा है। विशिष्ट धार्मिक स्थलों को वास्तविदों के अनुसार वर्तमान समय में सुदृढ़ करने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा करवाया जा रहा है। अयोध्या से आए पंडित अवधेश पांडे ने बताया कि यहां रामलला मंदिर का निर्माण एक विशिष्ट योगदान के रूप में माना जा रहा है। काशी विश्वनाथ मंदिर में दशा सुमेर घाट से प्रसिद्ध विश्वनाथ मंदिर तक जो व्यवस्था की गई है वह अप्रतिम कार्य है। इसी प्रकार अन्य विशिष्ट धार्मिक स्थलों का भी निर्माण कार्य व व्यवस्थित करने की योजना में केंद्र सरकार दत्त चित प्रयास कर रही है। डॉ सुनील श्रीवास्तव ने कहा की महाकाल उज्जैन में मंदिर के लिए व्यवस्थित इन्तजाम सहित वहां पर दर्शनज्ञों के लिए किया जा रहा प्रायस केंद्र सरकार की महत्व को दर्शाता है। पंडित ज्योतिषाचार्य  राजनाथ झा ने कहा कि मिथिलांचल परिक्षेत्र में 15वीं शताब्दी में हेमांगद ठाकुर नामक विद्वान ने 1000 वर्षों तक के ग्रहण माला तैयार किया।आज भी यह ग्रन्थ  अद्वितीय है। मुगल शासक के द्वारा उन्हें जेल में रख दिया गया। जेल के काल कोठरी में रहकर अपने ज्ञान के बदोलत उन्होंने चंद्र ग्रहण व सूर्य ग्रहण लगने की तिथि का निर्धारण लिखना शुरू किया।  अग्रिम हजारों वर्षों तक ग्रहण की तिथि का निर्धारण उन्होंने कर दिया। जेल से निकलने के बाद मिथिलांचल के लोगों ने उनकी लिखित सभी भोजपत्र पर संग्रहित तथ्यों को एकत्रित किया। विद्वानों द्वारा पुस्तक का निर्माण किया गया। जिसका नाम ग्रहण माला रखा गया। पंडित आचार्य राजनाथ ने कहा कि आज भी दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पुस्तकालय  में यह पुस्तक संग्रहित है। अवसर पर बंगाल से पहुंची अनीता तिवारी ने बताया की वास्तु विद कला की ज्ञान से लोगों के रहन-सहन व सामान्य जीवन की शैली में परिवर्तन हो जाता है। भवन के निर्माण करते समय इस बात पर ध्यान देना अति आवश्यक बताया। अवसर पर तनुजा ने कहा कि औरा शक्ति के माध्यम से किसी भी भूखंड पर वहां की सामान्य स्थिति का अवलोकन किया जा सकता है। इसमें सावधानी बरतने पर आकस्मिक घटनाओं से बचने की उपाय हैं। कार्यक्रम में आयोजक मंडल द्वारा आगत अतिथियों को पाग दुपट्टा व मोमेंटो से स्वागत किया गया। अयोध्या के पंडित अवधेश पांडे को पैर रेखा विशेषज्ञ के रूप में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। आयोजक मंडल के मुख्य सदस्य  शुभम श्रीवास्तव ने आगत अतिथियों का स्वागत किया।  सभी ज्योतिषाचार्य के प्रति आभार अभिनंदन व्यक्त किया।

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