February 15, 2026

हर हर महादेव के उद्घोष से भक्ति में हुआ देव स्थल, हजारों श्रद्धालुओं ने महाशिवरात्रि पर देव मंदिरों में की पूजा अर्चना

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मंदिर परिसर में भीड़ 
मधुबनी 
महाशिवरात्रि पर्व पर जिले के विभिन्न महादेव मंदिर एवं देवी मंदिरों में सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना किया और हर हर महादेव के नारों से क्षेत्र को भक्ति में बना दिया! महाशिवरात्रि एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। यह त्योहार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है, जो आम तौर पर फरवरी या मार्च में पड़ता है। महाशिवरात्रि का महत्व है भगवान शिव की पूजा महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है, जो हिंदू धर्म में एक प्रमुख देवता हैं। इस दिन शिवलिंग की पूजा की जाती है, जो भगवान शिव का प्रतीक है! महाशिवरात्रि का त्योहार आध्यात्मिक उन्नति के लिए मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करके व्यक्ति अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने से पापों का नाश होता है। इस दिन की गई पूजा से व्यक्ति के सभी पापों का नाश हो जाता है।महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने से सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।
इस दिन की गई पूजा से व्यक्ति के जीवन में सुख और समृद्धि आती है।महाशिवरात्रि के दिन योग और ध्यान का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ योग और ध्यान करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ होता है।जिले में कई प्रसिद्ध महादेव मंदिर हैं। उगना महादेव मंदिर भवानीपुर गांव में स्थित है, यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और कवि विद्यापति के साथ जुड़ा हुआ है। जहां सुबह से ही पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी!एकादश रुद्र महादेव मंदिर मंगरौनी ग्राम में स्थित, यह मंदिर 1953 में स्थापित किया गया था और इसमें 11 शिवलिंग हैं। मिथिला के लोग पूजा अर्चना करने के लिए आते जाते रहते हैं! कपिलेश्वर मंदिर मधुबनी मुख्यालय से 9 किलोमीटर दूर, यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मिथिला में इसे बाबा धाम के नाम से पुकारा जाता है जहां प्रतिदिन हजारों लोगों पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं महाशिवरात्रि में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है! शांतिनाथ महादेव मंदिर झंझारपुर में स्थित, यह मंदिर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह ऐतिहासिक स्थल है जिसके कारण शिव भक्तों की भीड़ लगी रहती है! बाबा बिदेश्वर स्थान झंझारपुर में स्थित, यह मंदिर भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। महाशिवरात्रि में पूजा अर्चना करने के लिए क्षेत्र के लोग पहुंचते हैं! सोमनाथ महादेव मंदिर सौराठ गांव में स्थित, यह मंदिर हर साल मिथिलाचंल के लोगों के लिए सौराठ सभा का आयोजन करता है। यह मंदिर दरभंगा महाराज के द्वारा स्थापित किया गया है जो काफी महत्वपूर्ण माना जाता है यहां भी महाशिवरात्रि में विशेष आयोजन होते हैं! दूसरी और मिथिला के हृदय स्थल मधुबनी के कन कन में प्रसिद्ध देवी स्थल प्राचीन काल से अवस्थित है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण उच्चैठ भगवती मंदिर बेनीपट्टी से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, यह मंदिर देवी काली को समर्पित है और 58 सिद्धपीठों में से एक है। महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालुओं ने सुबह से ही पहुंचकर पूजा अर्चना किए हैं वैसे यहां प्रत्येक दिन हजारों लोगों की भीड़ होती है!मनसा देवी मंदिर हरिपुर बख्शी टोल में स्थित, यह मंदिर लिंगराज मंदिर की तर्ज पर बनाया  है। यह काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है! कोइलखी भगवती मंदिर राजनगर में स्थित, यह मंदिर मिथिलांचल का एक प्राचीन और ऐतिहासिक शक्तिपीठ है।छिन्नमस्तिका मंदिर झंझारपुर में स्थित, यह मंदिर बिहार का एकमात्र सिद्ध पीठ है जहां मां के 32 अंगों में से एक की पूजा होती है।बूढ़ी माई मंदिर  मंगरौनी ग्राम में स्थित, यह मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र है।राज राजेश्वरी मंदिर*: बहरवन बेलाही गांव में स्थित, यह मंदिर माता राज राजेश्वरी को समर्पित है।माँ तारा चंडी मंदिर: यह मंदिर भी मधुबनी जिले में स्थित है! इसके अलावा दो दर्जन से अधिक शिव मंदिर विभिन्न गांव में अवस्थित है जहां पूजा अर्चना करने के लिए लोग सुबह से ही लंबी करें लगाकर दर्शन किए! महाशिवरात्रि पर्व को लेकर दिनभर देव मंदिरों में चहल-पहल बना रहा श्रद्धालुओं की भीड़ दिनभर जुटी रही! जिला प्रशासन की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी!

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