मानव जीवन को ऊर्जावान बनाने की आध्यात्मिक प्रक्रिया है रुद्राभिषेक – मृत्युंजय झा
सौराठ के सोमनाथ मंदिर में संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष ने किया रुद्राभिषेक “वेद पुस्तक देते हुऎ पर्यतन मंत्री को संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष, एमएलसी
मधुबनी
सोमनाथ मंदिर पर हमला के 1000 वर्ष पूर्ण होने पर मधुबनी स्थित अपने गृह जिला मधुबनी के सौराष्ट्र (सौराठ) के सोमनाथ मंदिर के प्रांगण में आयोजित रुद्राभिषेक सह शिव पूजन कार्यक्रम के उपरांत बिहार संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने कहा कि रुद्राभिषेक केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को शुद्ध, संयमित और ऊर्जावान बनाने की आध्यात्मिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का अभिषेक व्यक्ति के अंतर्मन में व्याप्त नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मकता, शांति और आत्मबल का संचार करता है।

श्री झा ने बताया कि शास्त्रों में रुद्राभिषेक को कल्याणकारी और दुःखनाशक बताया गया है। जल, दूध, दही, घृत, मधु एवं गंगाजल से किया गया अभिषेक शरीर, मन और आत्मा – तीनों के शोधन का प्रतीक है। इससे न केवल व्यक्तिगत जीवन में संतुलन आता है, बल्कि परिवार और समाज में भी सौहार्द एवं सद्भाव की भावना विकसित होती है।ंउन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण युग में रुद्राभिषेक की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। यह साधना व्यक्ति को धैर्य, सहनशीलता और आत्मसंयम प्रदान करती है। शिवोपासना के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर छिपी शक्तियों को जागृत कर जीवन के संघर्षों का सामना करने की क्षमता प्राप्त करता है।बोर्ड अध्यक्ष ने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ें और रुद्राभिषेक जैसे वैदिक अनुष्ठानों के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक पक्ष को समझें। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में पूजा और साधना केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन-प्रबंधन का मार्ग है।इस अवसर पर दर्जनों संस्कृत प्रेमी, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता एवं राज नेता कार्यक्रम में शामिल थे!
