विधायकों के फोन का तत्काल जवाब दें अधिकारी, पत्राचार पर समय-सीमा में कार्रवाई का निर्देश
मुख्यमंत्री से मिलते मधुबनी के जनप्रतिनिधि फाइल फोटो
मधुबनी
मधुबनी जिला मुख्यालय में पिछले एक सप्ताह से जिला अधिकारी आनंद शर्मा के द्वारा जनप्रतिनिधियों का फोन नहीं उठाने के मामले को लेकर मधुबनी के सांसद अशोक यादव, एमएलसी घनश्याम ठाकुर, विधायक सुधांशु शेखर, मीणा कामत, सुजीत पासवान ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर लिखित शिकायत दिया गया था l मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा पत्र निकालकर एक आदेश जारी कराए हैं l
बिहार सरकार ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय तथा प्रोटोकॉल के प्रभावी अनुपालन को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मोहम्मद सोहैल ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं सचिव, पुलिस महानिदेशक, प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर विधानसभा सदस्यों के प्रति प्रोटोकॉल, शिष्टाचार और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने को कहा है।
विभाग के 21 अगस्त 2026 को जारी पत्र में 17 जुलाई 2026 को बिहार विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई वरीय अधिकारियों की बैठक का हवाला दिया गया है। बैठक में विधानसभा सदस्यों के प्रति अपेक्षित प्रोटोकॉल एवं शिष्टाचार के प्रभावी अनुपालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने पर जोर दिया गया था।कॉल मिस हो तो यथाशीघ्र करें वापससरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी विधानसभा सदस्य का फोन आने पर अधिकारी यथासंभव तत्काल उसका जवाब दें। अपरिहार्य कारणों से कॉल रिसीव नहीं हो पाने की स्थिति में संबंधित अधिकारी को यथाशीघ्र वापस फोन कर आवश्यक संवाद स्थापित करना होगा।
पत्राचार पर समय-सीमा में कार्रवाईविधायकों से प्राप्त पत्रों की प्राप्ति की सूचना तत्काल देने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, संबंधित पत्र पर की गई कार्रवाई अथवा उसकी वर्तमान स्थिति से निर्धारित समय-सीमा के भीतर विधानसभा सदस्य को अवगत कराने को कहा गया है। इससे जनहित से जुड़े मामलों में प्रशासनिक जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होने की उम्मीद है।कार्यालय पहुंचने पर प्रोटोकॉल का पालन
सरकार ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि किसी विधानसभा सदस्य के कार्यालय पहुंचने पर उनके पद और गरिमा के अनुरूप प्रोटोकॉल एवं शिष्टाचार का पालन किया जाए। अधीनस्थ कार्यालयों के पदाधिकारियों और कर्मियों से भी इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है।सरकार के इस निर्देश को जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय तथा जनहित से जुड़े मामलों के समयबद्ध निष्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
