मुख्यमंत्री के तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की ऐतिहासिक पहल सड़क बिना अधूरा
आईटीआई कॉलेज
बेनीपट्टी
बिहार सरकार के उदासीनता के कारण करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित आईटीआई कॉलेज सड़क के बिना नाकाम साबित हो रहा है स्थानीय जनप्रतिनिधि के लापरवाही के कारण महत्वपूर्ण मामले को लेकर राज्य सरकार और जिला प्रशासन के सामने उक्त समस्या को नहीं रखने के कारण अपने स्थापना कल से ही आईटीआई कॉलेज आंसू बहा रहा है! त्रिलोक नाथ झा सामाजिक सह आरटीआई कार्यकर्ता, संतोष कुमार शिवनगर, अभिषेक कुमार झा व सुमित झा बेनीपट्टी ने शिवनगर आईटीआई पहुँच पथ को लेकर पटना में बिभागीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष दायर की लोक शिकायत! जानकारी के अनुसार बेनीपट्टी प्रखंड के शाहपुर पंचायत अंतर्गत स्थित राजकुमारी ताराकांत राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, शिवनगर मैं स्थापित है! आईटीआई तक समुचित एवं पक्के पहुँच पथ निर्माण की मांग को लेकर अब मामला राज्य स्तर पर पहुँचा है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों ने यह लोक शिकायत सीधे डायरेक्टर, विभागीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, पटना (बिहार) के समक्ष दायर की है।परिवाद में कहा गया है कि इस संस्थान के लिए बिहार विधान परिषद के पूर्व सभापति पंडित ताराकांत झा द्वारा लगभग चार एकड़ भूमि दान दी गई थी, जो क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की ऐतिहासिक पहल थी। वर्ष 2012 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं शिवनगर आकर इसका शिलान्यास किया था तथा वर्ष 2017 में उद्घाटन कर इसे युवाओं को समर्पित किया गया।हालांकि स्थापना के लगभग चौदह वर्ष बीत जाने के बाद भी संस्थान तक पक्के पहुँच पथ का निर्माण नहीं हो सका है। बरसात के मौसम में मार्ग कीचड़ और जलजमाव से भर जाता है, जिससे छात्र-छात्राओं को जान जोखिम में डालकर आना-जाना पड़ता है। शिक्षकों एवं कर्मियों को भी अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। परिवाद में इसे शिक्षा के अधिकार और कौशल विकास नीति के मूल उद्देश्य के विपरीत बताया गया है।परिवाद दायर करने वालों में त्रिलोक नाथ झा (सामाजिक सह आरटीआई कार्यकर्ता), संतोष कुमार (ग्राम शिवनगर), अभिषेक कुमार झा (ग्राम बेनीपट्टी) एवं सुमित झा (ग्राम बेनीपट्टी) शामिल हैं। उन्होंने संयुक्त रूप से कहा है कि जब किसी संस्थान का शिलान्यास और उद्घाटन राज्य के सर्वोच्च स्तर पर हो चुका हो, तब उसकी आधारभूत सुविधा — सड़क — का अभाव प्रशासनिक उपेक्षा को दर्शाता है।परिवादियों ने राज्य स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि अविलंब प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर पहुँच पथ का निर्माण सुनिश्चित कराया जाए, ताकि क्षेत्र के युवाओं को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके और सरकार की कौशल विकास योजनाएँ वास्तविक रूप में धरातल पर साकार हो सकें।
